Vote Chori Protest: EVM से अब वोटर लिस्ट पर बवाल! राहुल गांधी के आरोप से कांग्रेस मंत्री की कुर्सी गई – सच्चाई क्या है?

Vote Chori Protest: देश की सियासत में इस वक्त सबसे गरम मुद्दा है – चुनाव चोरी का आरोप। विपक्ष खुलकर कह रहा है कि बीजेपी, चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी कर रही है और इसी के दम पर चुनाव जीते जा रहे हैं।

राहुल गांधी का दावा है कि कर्नाटक की बेंगलुरु सेंट्रल सीट की वोटर लिस्ट में 1 लाख से ज्यादा फर्जी वोटर्स के नाम थे और इन्हीं के दम पर बीजेपी ने यह सीट “चुरा” ली। लेकिन इसी बीच, कर्नाटक के कांग्रेस मंत्री के. एन. राजन्ना ने बयान दे दिया कि अगर गड़बड़ी है तो उसके लिए खुद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है। नतीजा – उन्हें आज इस्तीफा देना पड़ा!

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष के वार

विपक्षी सांसद लगातार आरोप लगा रहे हैं कि देश में चुनाव निष्पक्ष नहीं हो रहे।
राहुल गांधी के बयान के बाद पूरा विपक्ष उनके साथ खड़ा दिखा और बोला – “ये भारत के लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है।”

लेकिन कांग्रेस के अपने मंत्री राजन्ना ने कहा कि वोटर लिस्ट उसी वक्त बनी जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। इससे पार्टी के अंदर ही बवाल मच गया और उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा।
अब चर्चा ये है कि क्या राजन्ना सच बोल गए थे और यही वजह है कि कुर्सी चली गई?

वोटर लिस्ट बनाने में सरकार की भूमिका

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यहां एक अहम बात – वोटर लिस्ट सीधे चुनाव आयोग बनाता है। हाँ, इसमें राज्य सरकार के कर्मचारी (BLO) मदद करते हैं, जैसे सरकारी टीचर, पंचायत सचिव, पटवारी। तो तकनीकी तौर पर राज्य सरकार सीधे वोटर लिस्ट तैयार नहीं करती, लेकिन उसके कर्मचारियों का रोल जरूर होता है। यानी, राहुल गांधी अगर गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं, तो सवाल कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर भी उठ सकता है।

कांग्रेस मंत्री के बयान के पीछे की सियासत

राजन्ना का बयान सिर्फ तकनीकी बहस नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
कुछ लोग कहते हैं कि वो पहले से ही मुख्यमंत्री बदलने की बात कर रहे थे, तो ये बयान शायद पार्टी पर दबाव बनाने के लिए था। पर सच चाहे जो हो, उनके उठाए सवाल पूरी तरह गायब नहीं किए जा सकते।

राजनीति में इसे Audio Masking कहते हैं – यानी, किसी अनचाही आवाज को दूसरी आवाज से दबा देना।

संसद से चुनाव आयोग तक विपक्ष का पैदल मार्च

आज विपक्षी सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक पैदल मार्च किया। मकसद था – शिकायत दर्ज कराना और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का सबूत देना।

लेकिन दिल्ली पुलिस से टकराव हो गया। पुलिस का कहना – “इजाजत नहीं ली गई थी”, विपक्ष का जवाब – “शांतिपूर्ण मार्च के लिए इजाजत क्यों?”

हंगामे में अखिलेश यादव बैरिकेड्स पर चढ़ गए। गर्मी और भीड़ में TMC सांसद महुआ मोइत्रा बेहोश हो गईं, दो और सांसदों की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाना पड़ा।

संसद में हंगामे का भारी नुकसान

आंकड़े बताते हैं – 2014 से 2025 के बीच लोकसभा का 32% समय हंगामे में बर्बाद हुआ। कुल 1450 घंटे की कार्यवाही ठप रही, जिससे 2,175 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ।

पहले EVM पर सवाल उठते थे, अब वोटर लिस्ट पर। पिछले साल महाराष्ट्र में 10 सीटों पर EVM गड़बड़ी के आरोप लगे थे, लेकिन जांच में मशीनें सही निकलीं। अब विपक्ष का कहना है – असली खेल वोटर लिस्ट में है।

राहुल गांधी के आरोप – और उनकी खामियां

राहुल का कहना – वोटर लिस्ट में फर्जी नाम डालकर चुनाव जीते जाते हैं। जिन इलाकों में बीजेपी कमजोर होती है, वहां हजारों-लाखों नकली वोटर जोड़ दिए जाते हैं – गलत पते, बिना फोटो वाले कार्ड, एक फोटो पर कई कार्ड।

लेकिन यहां कुछ सवाल हैं –

  1. क्या इन फर्जी नामों से सच में वोट डाले गए?
  2. अगर गड़बड़ी थी, तो चुनाव से पहले कांग्रेस ने लिस्ट की जांच क्यों नहीं की?
  3. हो सकता है कांग्रेस के जीते इलाकों में भी ऐसे डुप्लीकेट वोटर हों – तो क्या वहां भी धांधली मानी जाएगी?

असल समस्या है वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण। बीएलओ के सहारे काम होता है, लेकिन कई जगह इतनी लापरवाही होती है कि फर्जी नाम हटते ही नहीं।

EC की शर्त और राहुल गांधी की चुप्पी

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं।
चुनाव आयोग ने कहा – “अगर आरोप पक्के हैं, तो शपथपत्र देकर बताइए”
लेकिन राहुल ने अभी तक शपथपत्र नहीं दिया।
इससे सवाल उठता है – अगर आरोप सही हैं, तो जिम्मेदारी लेने में हिचक क्यों?

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